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दादरी की पीड़ा और हमारी इंसानियत!

प्रभुनाथ शुक्ल (लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं) धर्म और उसकी धारणा में हम अंतर आज तक नहीं कर पाए हैं। धर्म क्या किसी इंसानियत, मानवीयता और सहिष्णुता से अलग कोई परिभाषा गढ़ता है? सवाल उठता...